How Engine Coolant Works Complete Guide to Car Coolant

Coolant वाहनों में उपयोग होने वाला एक प्रकार का liquid  होता है।जो वाहनो  के इंजन को ज्यादा गर्म होने से बचाता है। यह पानी और एंटीफ्रीज (जैसे एथिलीन ग्लाइकॉल) का मिश्रण होता है। जो इंजन से उत्पन होने वाली  गर्मी को  Absorb करके  Radiator  तक ले जाता है। और वहां से ठंडा होकर वापस इंजन में लौटता है। कूलेंट पानी और एथिलीन ग्लाइकॉल या प्रोपाइलीन ग्लाइकॉल का मिश्रण होता है।  इसके मिश्रण में 50% ग्लाइकॉल और 50% पानी का होता है। ये नीले ,गुलाबी या लाल रंग में मिलता है।

Coolant के प्रकार

इसको बनाने में तीन प्रकार की अलग अलग Technique का उपयोग किया जाता है।

Inorganic Additive Technology

Organic Additive Technology

Hybrid Organic Additive Technology

Inorganic Additive Technology

इसमें  Inorganic  केमिकल Additive  का उपयोग किया जाता है। जिसका  काम  इंजन और रेडिएटर को जंग से बचाना है। ये  कूलेंट  Ethylene Glycol, Silicates ,Phosphates, Borates, Nitrates और demineralized water  से मिलकर बनाया जाता है। जो इंजन के  ब्लॉक और पार्ट्स को,  रेडिएटर और उसके पाइप्स को सुरक्षा देता है।  ये Cast Iron Blocks  वाले Engine के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।

Organic Additive Technology

यह कूलेंट टेक्नोलॉजी एल्यूमीनियम में क्रेविस कोरोजन और कास्ट आयरन में कैविटेशन कोरोजन-इरोजन से बेहतरीन सुरक्षा देती है, और  रेडिएटर कंपोनेंट्स को बचाती है ।और Engine की लंबी उम्र सुनिश्चित करती है।

यह रबर और सीलिंग मटीरियल के साथ Compatibility  भी बनाए रखता है। और नॉन-सिलिकेट हार्ड वॉटर की मौजूदगी में भी कूलेंट को जेल बनने और जमने से रोकता है। जिससे बेहतर कूलेंट स्टेबिलिटी और कूलेंट की लंबी प्रभावी लाइफ सुनिश्चित होती है। इसकी बेहतरीन हीट ट्रांसफर प्रॉपर्टीज़ इंजन के ज़्यादा तापमान वाले हिस्सों को प्रभावी ढंग से ठंडा करने और उन्हें नुकसान से बचाने में मदद करती हैं।

Hybrid Organic Additive Technology

पहले  वाहनों में कास्ट आयरन के इंजन और कॉपर के रेडिएटर उपयोग होते थे।  जहाँ Inorganic Additives Technology   वाला कूलेंट अच्छा काम करता था । और फिर जब  एल्युमिनियम इंजन, प्लास्टिक पार्ट्स और हाई-टेम्परेचर इंजन उपयोग  होने लगे तब Organic Additive Technology  की जरूरत पड़ी, बाद में वाहनों में दोनों तरह के मेटल उपयोग होने लगे । और फिर  इस टेक्नोलॉजी के कूलेंट का उपयोग  होने लगा इसमें Organic Additive और Inorganic Additives दोनों को मिलाया जाता है। Organic Additives से Heat Transfer अच्छा होता है और Inorganic Additives  जंग से सुरक्षा देते हैं और Aluminum पार्ट्स को बचाते हैं।

इंजन में Coolant कैसे काम करता है

कूलेंट को रेडिएटर सिस्टम से जुड़े एक कंटेनर में स्टोर किया जाता है, फिर यह इंजन ब्लॉक और संबंधित हिस्सों में बहता है। कूलेंट पंप, जिसे वॉटर पंप भी कहा जाता है, पूरे सिस्टम में कूलेंट को Circulate करता है ।रेडिएटर कूलेंट फ्लूइड से गर्मी को बाहर निकालने में मदद करता है। रेडिएटर के Hose Pipe  कूलिंग सिस्टम के अलग-अलग हिस्सों को एक साथ जोड़ते हैं।जब वाहन की स्पीड नेचुरल एयरफ्लो के लिए काफी नहीं होती, तो कूलिंग फैन रेडिएटर के आर-पार हवा खींचता है।

Hand-drawn diagram showing how engine coolant flows through the engine, radiator, water pump, and coolant reservoir to control engine temperature.
explaining the flow of coolant in an engine cooling system.

Thermostat Valve कूलेंट के तापमान लेवल को कंट्रोल करता है। इंजन चलने के दौरान, कूलेंट लगातार इंजन और रेडिएटर के बीच घूमता रहता है। रेडिएटर में ठंडा होने के बाद, फ्लूइड नीचे से बाहर निकलता है। फिर वॉटर पंप इसे अंदर खींचता है और इसे इंजन ब्लॉक और हेड से गुजारता है । जहाँ यह सही इंजन तापमान बनाए रखने के लिए ज़्यादा गर्मी को सोख लेता है। आखिर में, गर्म कूलेंट फिर से ठंडा होने के लिए रेडिएटर के ऊपरी हिस्से में लौट आता है।

इंजन के लिए  कूलेंट और Radiator का महत्व

रेडिएटर वाहनों  के इंजन कूलिंग सिस्टम का एक ज़रूरी हिस्सा है। जो इंजन को ज़्यादा गरम होने से बचाने, फ्यूल एफिशिएंसी बेहतर बनाने, जंग और कोरोशन से बचाने और कूलेंट लेवल बनाए रखने के लिए इंजन के तापमान को कंट्रोल करता है। यह हुड के नीचे और इंजन के सामने होता है। जिसमें कोर, प्रेशर कैप, इनलेट और आउटलेट टैंक और रेडिएटर होज़ होते हैं। एक अच्छी तरह से मेंटेन किया गया रेडिएटर इंजन की बेहतरीन परफॉर्मेंस सुनिश्चित करता है और महंगे रिपेयर के जोखिम को कम करता है।

engine illustration shown alongside an engine coolant container, highlighting the role of coolant in controlling engine temperature.
An image showing how engine coolant helps protect the engine from overheating

रेडिएटर के रेगुलर मेंटेनेंस के लिए तय समय पर कूलेंट की जाँच और उसे बदलना ज़रूरी है। हालाँकि कूलेंट का प्रकार मेंटेनेंस शेड्यूल तय करता है, लेकिन एक सामान्य नियम के अनुसार इसे हर 50,000 KM पर बदलना चाहिए। कुछ नए वाहन मॉडल को ज़्यादा बार मेंटेनेंस की ज़रूरत हो सकती है।

उपयोग

Engine overheating  होने से बचाता है ।

इंजन को सही तापमान पर बनाए रखता है।

जंग (Rust) और Corrosion से सुरक्षा करता है।

Heat Transfer  को  बेहतर बनाता है।

इंजन की Performance में सुधार  करता है।

Coolant से Related कुछ सवाल और जवाब

Que- वाहनों में कूलेंट Level  कैसे चेक करें?

Ans  कूलेंट टैंक पर कूलेंट को Min –Max Level पर देख कर।

Que-कूलेंट लीक होने के क्या  कारण हैं?

Ans -जब Radiator Hose Pipe कही से डैमेज हो या फिर रेडिएटर  डैमेज  हो या कूलेंट bottle Cap Open हो ।

Que- वाहनो में कूलेंट कितने समय तक चलता है?

Ans -अच्छी Quality का कूलेंट 2 से 4  साल तक काम करता है।

Que-क्या कूलेंट खत्म होने से वाहन का  Engine  सीज़ हो सकता है?

Ans -हाँ, ज्यादा  समय तक बिना कूलेंट के वाहन  चलाने से इंजन ज्यादा गरम होकर सीज़ हो सकता है।

निष्कर्ष

ऊपर ब्लॉग में आपने जाना की कूलेंट क्या होता है, ये कितने प्रकार का होता है, और कैसे ये इंजन में काम करता है, और इसका क्या उपयोग है।

Leave a Comment