जब किसी वाहन के इंजन का Temperature उसके नार्मल Work limit से अधिक हो जाता है, तो उसे Engine overheating कहते है। जो की Petrol Engine के लिए 90°C से 100 °C के बीच और diesel Engine के लिये 80°C से 100°C तक होता है। इसे अधिक Temperature होने पर इंजन को overheating कहा जाता है।
Engine में Heat generate कैंसे होती है
जब इंजन के अंदर पेट्रोल या डीज़ल का Combustion होता है, तब इंजन को Power मिलती है जिससे बहुत अधिक heat निकलती है। इसके साथ ही Engine के पिस्टन, क्रैंकशाफ्ट आदि पार्ट्स आपस में एक दूसरे के टकराते है जिसके कारण भी heat generate होती है। इसके अलावा जब वाहन काफी टाइम तक बिना रुके चल रहा हो या उस पर कोई heavy लोड हो तब भी इंजन काफी गर्म हो जाता है जिस कारण engine से heat generate होती है।
Engine overheating के कारण
Overheating के निम्न कारण होते है –
1 – जब वाहन में Coolant की मात्रा कम हो। क्योकि Coolant ही ऐसा liquid होता है जो इंजन को ठंडा रखता है यदि वाहन में coolant नहीं है तो इंजन में overheating की problem बने रहेंगी।
2 -यदि वाहन का Radiator खराब है तो भी ये problem बनी रहती है । Radiator खराब होने के अनेक कारण हो सकते है। जैसे उसके फिन्स टूट गए हो और उसके अंदर गंदगी जमा हो गयी हो।
3 -जब वाहन का Radiator Fan काम करना बंद कर दे तब भी ये problem आती है। क्योकि जब वाहन की स्पीड कम होती है या जब वाहन को Start किया जाता है तो तब रेडिएटर फैन चालू हो जाता है और हवा देने लगता है ताकि Engine की Heat को बाहर निकाल सके। Fan के ख़राब का होने का एक कारण इसकी मोटर भी हो सकती है।
4- यदि वाहन का Thermostat Valve खराब हो तो तब भी ये Problem आती है क्योकि Thermostat valve इंजन के Temperature को Maintain रखता है ।ये Coolant के Flow को Control करता है। यदि ये खऱाब हो जाये तो Engine में Coolant Circulate नहीं होगा।
5- Engine oil की कमी के कारण भी इंजन में ये प्रॉब्लम आती है क्योकि ये आयल Engine के पार्ट्स में Friction को कम करता है।
6 -जब वाहन के इंजन पर ज़्यादा लोड हो और वाहन में AC ON करके Hill Area में लगातार Driving करने से भी इंजन में overheating की Problem होती है।
Engine overheating के लक्षण
निम्न लक्षणों से ओवरहीटिंग का पता लगाया जा सकता है-
1 -जब वाहन के Dashboard में लगे Cluster में Temperature मीटर की की सुई अपने जगह से रेड ज़ोन के पास पहुंच जाती है या वहीं पर रुक जाती है । ये ओवरहीटिंग का सबसे पहला लक्षण होता है। कई वाहनों में Temperature या Coolant की रेड वार्निंग लाइट जल जाती है।
2-जब वाहन के बोनट या hood के अंदर से सफेद धुआं निकलने लगे तो ये इंजन गर्म होने का एक लक्षण होता है क्योकि जब Coolant बहुत ज्यादा गर्म होने लगता है तो उसमे से सफेद धुआं निकलने लगता है।

3 -जब वाहन में चलते चलते पिक‑अप कम होने लगे तो भी ये ओवरहीटिंग का एक लक्षण होता है ।
4 -जब वाहन के इंजन से नॉकिंग की आवाज़ आने लगे तभी भी ये प्रॉब्लम के लक्षण है। क्योकि तापमान बढ़ने से Engine के अंदर के पार्ट्स पर ज्यादा लोड पड़ता है और वो आवाज़ करने लगते है।
इंजन ओवरहीटिंग को कैसे कंट्रोल किया जाए
वाहन के कूलिंग सिस्टम की लगातार Monitoring करनी चाहिए। Coolant लेवल को चेक करते रहना चाहिए। Radiator को चेक करते रहना चाहिए ,उसके फिन्स की लगातार जांच करते रहना चाहिए। Radiator Hose pipe को अच्छे से check करते रहना चाहिए ये कही से Damage नहीं होना चाहिए ताकि Coolant लीकेज को रोका जा सके। Radiator fan और Thermostat Valve को चैक करते रहना चाहिए की ये Working Condition में है या नहीँ।

ओवरहीटिंग से Related सवाल और उनके जवाब
Que-क्या इंजन ओवरहीट होने पर इंजन में पानी डालना चाहिए ?
Ans -नहीं गर्म इंजन में पानी डालने से इंजन ब्लॉक हो सकता है ।
Que-क्या AC चलाने से इंजन ज़्यादा गर्म होता है?
Ans -हाँ, AC चलाने से इंजन पर अतिरिक्त लोड पड़ता है,जिस से Engine Heat हो जाता है।
Que- क्या इंजन ओवरहीट होने पर वाहन चलाना चाहिए ?
Ans -नहीं। इंजन ओवरहीट होने पर वाहन चलाने से वाहन का इंजन सीज़ हो सकता है।
Que इंजन ओवरहीट होने पर क्या करना चाहिए ?
Ans -वाहन को रोक कर इंजन को बंद कराना चाहिए ।
Que -क्या वाहनों में सिर्फ गर्मियों में ही ओवरहीटिंग होती है?
Ans -नहीं सर्दियों में भी होती है।
निष्कर्ष
ऊपर ब्लॉग को पढ़ आप को समझ आया होगा कि वाहनों में इंजन ओवरहीटिंग क्या होती है? इसके क्या कारण है ?इसके क्या लक्षण होते है? और वाहनों में इंजन ओवरहीटिंग को कैसे कण्ट्रोल किया जा सकता है।
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